जिंदिगी के कुछ रिश्ते है
जो बन नहीं पाते
कुछ फासले होते है जिंदगी के
जो मिट नहीं पाते
मंजिले कई होती है जिंदगी की
कुछ मंजिले हम पा नहीं पाते
उड़ना तो चाहते है आकाश की उचाइयो में,
कुछ पर है जो खुल नहीं पाते
फस जाते है जिंदगी के उधेड़-बुन में
और कुछ सपने है जो पुरे हो नहीं पाते |
कोई न साथ निभायेगा
रे मेरे मन
माँ बाप संग तेरे
जिनके गोद में बिता तेरा बचपन
कब तक दोस्त संग तेरे
रिश्ते नाते प्यार भी तेरा
एक दिन साथ देगा छोड़ तेरा तन
कुछ तो ऐसा कर जायो, कि
याद करे सारे जन
लाखो की भीड़ में
तू अकेला, अकेला तेरा तन
वो मेरे मन |
तेरी याद आती है जब मुझ को बहुत तडपाती है तब दिल को कागज पर लिखता हूँ कुछ खुद को बहलाने को सुख जाती है जिव्हा लेखनी की, और मांगती मिन्नतें न चलने को फिर देखता हूँ अपनी सुनी आखों से दाग़ - दार हुए उस कागज को कोई शायरी नहीं कोई कविता नहीं दीखता है तेरा अक्स मुझको रुलाने को |
उसका एक लाल है
जल रही है ज्वर ताप से
पर लाल की दो छीक से बेहाल है
सो गई बिन तोड़े एक भी निवाला
पर सुला नहीं सकती उसको, जबतक
सान्त न हो जाये लाल की भूख ज्वाला
तब न पूछो उसकी हृदय वेदना
दूर है लाल से और सुनती है उसका रोना
खरोच भी लग जाती है अगर किसी
धारदार से उसके लाल को
है सामर्थ उस समय कि
पिघला दे वो संसार के हर औजार को
माँ के कोमल दिल का कोई तोड़ नहीं हो सकता
उसकी ममतामई आचल कि छाव का कोई मोल नहीं हो सकता
करुणा है जिसमे ममता है जिसमे दिल में भरा है प्यार
ऐसी ही माँ है हमारी माँ के चरणों में है संसार
HI
Myself Piyush Srivastava. By nature I am simple and jolly. I have many Passions, in one of them I like most is writing, and that resulted to start Blog writing. Mostly I like to write Poems, but Spirituality attracted me. One more thing that I like is Nature. I have got learning nature and want to increase my knowledge in the field which I like most.