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Saturday, August 31, 2013

मैं कुवारा हूँ, आज भी तुम्हारा हूँ

मैं कुवारा हूँ, आज भी तुम्हारा हूँ
पतंग की मदमाती उड़ान की तरह
समुन्दर के लहरो में आये उफान की तरह
हर बधावो को तोड़
आज भी तुम्हारे इंतज़ार में हूँ
उचाईयों से अब नहीं डरता मैं
हिरनी सा कुचाल भरता मैं
सबकुछ अब पीछे छोड़ आया
बड़े मुददत के बाद तेरी यादो को दिल में सजाया हूँ
चलते चलते दूर बहुत आ निकला
अब तो लगता है परछाई भी साथ छोड़ देगी
मुक्कदर ही बता सकती है अब कहाँ जा रहा हूँ
कुछ अंदेशा सा है शायद तुम्हारे पास आरहा हूँ
मेरी कस्ती डगमगा जाती हैं
मौत भी आकर गुजर जाती हैं
लोग हँसते है हँसाते हैं
पर मुझे तो सभी रुलाते हैं
अब कुछ भी करने को मन नहीं करता हैं
जाने किस बात से अब ये डरता हैं
हजारो की इस भीड़ में मैं खो गया हूँ
सच कहता हूँ तुम्हारे बिन मैं अकेला हो गया हूँ

Wednesday, July 24, 2013

आप को देखकर दिल में ये ख्याल आया

इस बार तो आपने कुछ कहर सा ढा दिया 
यू कहे तो आपने आसमा को ज़मी पर ला दिया
कौन कहता है कि  चाँद बस आसमा में ही दिखेगा  
एक नज़र कोई आप पर भी डाले 
सर उठाना छोड़ देगा 
आप के हुस्न की तारीफ़ में क्या कहु 
देख ले बादल भी जो आप को गरजना छोड़ देगा 
आखों में चमक होठो पर वो मुस्कान 
गर देख ले खुदा भी जो आप को 
खुदाई छोड़ देगा 
आचल को आप ने यू हवा में जो लहराया 
फ़िज़ावो ने एक नया गीत गाया 
कुछ सितारे जो टाक दू आप के आचल में 
फिर सारी कायनात ही आप को देख कर जाये सरमा
आप से मिल कर कुछ नया करने को मन चाहा
आप को देखकर दिल में ये ख्याल आया

Saturday, June 29, 2013

बदले हालत में बदलता मैं

हर कोई मेरा दिल दुखाने में लगा हैं
ये ज़माना मुझपर मुस्कुराने में लगा हैं
ये तन्हायी ये बेचैनीया अब जीने नहीं देती मुझे
और खुदा है जो मुझे मनाने में लगा है
हर रोज न जाने जहर का कितने जाम पी  जाता हूँ मैं
और शाखी है की अमृत पिलाने में लगा हैं
तमाम ख्वाहिसो और खुशियों को दफ़न कर आया
और चंडाल है की कब्र से ताबूत निकालें में लगा है
अपने गमो को हमसाथी बनाना सीख लिया हमने
और गम है की नये दोस्त बनाने में लगा है
न उमंग न तरंग है अब कोई बाकी
और फिजाये है की नए धुन बनाने में लगा है
अब मंजिल नहीं कोई हर राह बंद हो गई है
पर मुकद्दर है कि नए मोड़ बनाने में लगा है
हर कोई बदल गया इस जमाने की बदल में
हार ही गया हूँ अपने ही किये हुए पहल में
और बदकिस्मती है की मुझे फिर नए रूप में ला
इस बदले ज़माने से लड़ाने में लगा है .........

Wednesday, March 27, 2013

न मैं रहूगा न मेरी याद

एक रोज सो जाऊ गा मै 
फिर न आँखे नम होगी 
फिर न रोऊ गा मैं 
फिर न तेरी याद होगी 
न होगी मेरी तन्हाई 
फिर न होउगा कभी मैं अकेला 
और न होगी मेरी आवाज कोई 
न होगे होठ ये मेरे 
न इन पर तुम्हारा नाम होगा 
फिर न कभी मेरे मन को ठेस लगे गी 
फिर न मेरे दिल में दर्द होगा 
और न होगा उदास कभी
फिर न मेरे अधरों पर कोई मुस्कान होगी 
और न ही होगा एहसास कोई
फिर न कोई चाहत होगी 
और न ही कोई लालसा 
फिर कभी न भूख होगी
और होगी न कोई प्यास 
बस रहे गा ये नस्वर शरीर 
जिसे भी तुम राख कर दोगे 
और फिर उसके बाद 
न मैं रहूगा न मेरी याद 

कैसे समझाऊ कैसे बतलाऊ

रातो के नीद मेरी हराम करके 
वो चैन से सोते है 
उनकी होठो पर हँसी हमेशा 
और हम अक्सर ही रोते है
खुले गगन के नीचे वो 
मस्त मौला से रहती है 
मैं आवारा मैं बंजारा 
मन उसकी ही धुन में रहता है 
कैसे समझाऊ कैसे बतलाऊ 
ये दिल प्यार उन्ही को करता है 

Tuesday, March 26, 2013

ये प्यार नहीं तो क्या है


दिन - दिन भर गुमसुम रहता हूँ 

रातो को तारे गिनता हूँ 
जब सो जाती है सारी दुनिया 
पर मैं रोता रहता हूँ 
ये प्यार नहीं तो क्या है 
जो मैं तुमसे करता हूँ 
गर्म हवाए चलती, पर 
मैं ठिठुरता रहता हूँ 
सर्द मौसम भी होने पर
बिन कपड़ो के रहता हूँ 
सब कहते है क्या हाल है तेरा 
पर मैं चुप ही रहता हूँ 
ये प्यार नहीं तो क्या है 
जो मैं तुमसे करता हूँ 
भूख नहीं लगती अब मुझको 
हफ्तों तक नहीं कुछ खाता हूँ 
दो निवालो को ही खाने में 
घंटे कई लगता हूँ 
सब कहते है मर्ज को अपने दिख्लावो, पर
इन सब बातो से अब मैं कतराता हूँ 
ये प्यार नहीं तो क्या है 
जो मैं तुमसे करता हूँ 
नहीं लगती अच्छी अब 
सावन की हवा पुरवाई 
न डालो पर चिडियों का 
गाना सुन पाता हूँ 
घासों पर ओस की बुँदे 
नहीं सुहावनी लगाती है 
इस सृष्टी की सभी वादिया
आँखों में अब चुभती है
देखता रहू हर पल पल - पल तुमको  
महसूस यही अब करता हूँ  
ये प्यार नहीं तो क्या है 
जो मैं तुमसे करता हूँ
तुम आवो गी छम - छम करके 
कुछ गीत नए सुनावो गी 
तुम्हे छोड़ इस दुनिया की सारी बाते 
अब बेगानी लगती है 
इसी इंतजार में 
बस तेरे प्यार में 
कब से प्यासा बैठा हूँ 
 ये प्यार नहीं तो क्या है 
जो मैं तुमसे करता हूँ

Saturday, March 23, 2013

मोहब्बत के गलियारे में


मोहब्बत के उस गलियारे में 
एक पेड़ हमने भी लगाया था 
अरमानो की खाद डाली 
उम्मीदों से नहलाया था 
दुनिया के धुल और धुएं से 
बचाने की हर कोशीस करी हमने 
सूरज की तपिश को खुद पर झेल था 
ये चाहत लिए फले का फुले गा 
और छाव  देगा सभी को 
पर विडम्बना कुछ ऐसी हो गई 
नजाने क्यू 
लगाया था पेड़ आम का 
वो बबूल कैसे हो गया 

Friday, March 22, 2013

तेरा इंतजार करते है

मोहब्बत में दो आसू हमने भी गिराए है 
वफ़ा की राह में पैरो में काटे चुभाये है 
पटक दिया सर पत्थर  पर , कि 
जनाजा निकल जाये 
पर रहम उस पत्थर को भी आ गया 
उसने भी बक्श दिया मुझे 
शायाद ये सोचा कर 
की पिघल जाये वो कठोर दिल भी कभी 
पर न वो पत्थर दिल पिघली न पिघल उसका मन 
और हम रोते रह गए जबकि आसू भी हो गए ख़तम 
पर न हुआ कम उसका सितम 
अब तो बस जिए जा रहे है 
बची हुयी जिंदगी को अपने 
और बस इंतजार है 

Tuesday, March 19, 2013

मेरी खामोसी तेरी याद

हर आहट पर तेरा इंतजार होता है 
झनकती है जब कोई पायल 
लगता है की तुम होगी  
हटती है जब कड़ी दरवाजे की 
दिल बेचैन हो उठता है 
कही तुम तो नहीं 
पर हर आहट हर झंकार के बाद
हर बार दवाजा खुलने के बाद 
फिर वही खामोसी थी 
फिर वैसे ही दिल उदास 
क्यू कि इस बार भी तुम दूर थी 
नहीं थी तुम पास नहीं थी तुम पास 

Monday, March 11, 2013

फिर जिंदगी एक बार



फिर कुछ दिल ने कहा 
फिर तेरी याद आगई
मौसम ए बहार फिर इक बार 
दिल को मायूस कर गई 
हमने तो नदियों सा 
बहना सीख ही लिया था , पर
फिर जिंदगी एक बार 
समंदर की लहरों की तरह 
चटान से टकरा गई 
 
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