Saturday, March 23, 2013
Friday, March 22, 2013
तेरा इंतजार करते है
मोहब्बत में दो आसू हमने भी गिराए है
वफ़ा की राह में पैरो में काटे चुभाये है
पटक दिया सर पत्थर पर , कि
जनाजा निकल जाये
पर रहम उस पत्थर को भी आ गया
उसने भी बक्श दिया मुझे
शायाद ये सोचा कर
की पिघल जाये वो कठोर दिल भी कभी
पर न वो पत्थर दिल पिघली न पिघल उसका मन
और हम रोते रह गए जबकि आसू भी हो गए ख़तम
पर न हुआ कम उसका सितम
अब तो बस जिए जा रहे है
बची हुयी जिंदगी को अपने
और बस इंतजार है
Tuesday, March 19, 2013
Monday, March 11, 2013
Sunday, March 3, 2013
मैं मुसकुरने चला था
सब कुछ खो गया वो जो मैं पाने चला था
भूल गया हर शब्द उन तरानों के जो मैं गाने चला था
आँखो पर सजा लिए उन भावनावो को बना के मोती
जिन्हें आपने होठों से मुस्कुराने चला था
मुझे हर उस रास्ते ने ठोकर ही दिया
जिन पर चल कर मैं मंज़िल बनाने चला था
मेरी बेदाग तम्नावो ने मुझे जमी पर ला पटका
जिनकी पतंग बना मैं आसमा में उड़ाने चला था
अब तो उन दर्द को भी दर्द होने लगा है
जिन पर मैं मरहम लगाने चला था
सो गई हर ख्वाहिशे लेकर जहर का एक प्याला
जिन ख्वाहिशो को लेकर मैं अपनी जिंदगी सजाने चला था
विधि ने बस ठोकरे ही ठोकरे दी है मेरे नसीब में
मैं भूल इस बात को हँसने - हँसाने चला था मैं मुसकुरने चला था
Labels:
Hindi Poem,
Love poem,
Love you,
My Dream,
My Love
Friday, March 1, 2013
कोई नाम मिल जाये
मेरी खवाहिसो को कोई सौगात मिल जाये
तेरे होठो से कोई पैगाम मिल जाये
अभी तो बेआबरू ही जिए जा रहे है
तू समझ ले अगर दिल लगा के इसे
तो मेरी मोहब्बत को भी कोई नाम मिल जाये
तेरे होठो से कोई पैगाम मिल जाये
अभी तो बेआबरू ही जिए जा रहे है
तू समझ ले अगर दिल लगा के इसे
तो मेरी मोहब्बत को भी कोई नाम मिल जाये
Labels:
Hindi Poem,
Love poem,
Love you,
My Dream,
My Love
Sunday, December 23, 2012
आ गए हम कहाँ
जिंदगी के उतार चढावो में
गिरते संभलते हम आ गए कहाँ
बचपन की उस गोद से
माँ के आचल की छाव से
पापा के फटकार से
बाबा के प्यार से
दादी के लोरियों से
आ गए हम कहाँ
जब कोई गम न था
जब हम में हम न था
हर पेड़ पौधे जब दोस्त थे
गली का हर कुत्ता रखवाला था
निकल कर उस समय से
आ गए हम कहाँ
जब सब को परेशान करना
कोने में छुप कर गेंद के लिए रोना
पेन्सिल को खा के पेट भरना
टिफिन में मिले लडू को चुपके से
खाने की जो आदत थी
उन आदतों को कहाँ भूल आये हम
वो बचपन वो झूले वो लोरी
वो मासूमियत वो हसना वो रोना
कहाँ छोर आये हम
कब भूले वो सब पता भी न चला
समय का पहिया कुछ ऐसा चला
Labels:
Hindi Poem,
Love poem,
Love you,
My Dream,
My Love
Monday, June 25, 2012
ये ख्याल आया है
मन में ये ख्याल आया है
मेरी खयालो में कोई शाया है
पहचान उसकी छुपी है
पर लगता है कुछ यूँ कि
उसने बरसो से साथ निभाया है
उसके सूरत से अनजान हूँ पर
उसके आहट का मुझ पर सरमाया है
बैठे - बैठे जाने कैसे बस यूँ ही
ये ख्याल आया है
मेरी खयालो में कोई शाया है
पहचान उसकी छुपी है
पर लगता है कुछ यूँ कि
उसने बरसो से साथ निभाया है
उसके सूरत से अनजान हूँ पर
उसके आहट का मुझ पर सरमाया है
बैठे - बैठे जाने कैसे बस यूँ ही
ये ख्याल आया है
Labels:
Hindi Poem,
Love poem,
Love you,
My Dream,
My Love
तुम पास भी और दूर थी
जिंदगी इक तलाश थी तुझ से मिनले की प्यास थी
मिला जब भी तुझसे तू हर बार एक सवाल थी
मेरे अधरों की प्यास क्या बुझती, जब
मेरे सिने में धधगती आग थी
आसू बह रहे थे अंतर मन से
पर होठो पर मुस्कान थी
मंजिल बहुत दूर और राह भी मजबूर थी
मै खोजता तुम्हारा साथ
तुम पास भी और दूर थी
अकेला ही बढ़ता रहा मै
हर मोड़ पर तुमसे मिलने की आस थी
तुम पास भी और दूर थी
Labels:
Hindi Poem,
Love poem,
Love you,
My Dream,
My Love
Tuesday, April 24, 2012
TUM MERA PYAR HO
क्यू लगता है कि पास होकर भी दूर हो तुम
क्यू लगता है कि कुछ मजबूर हो तुम
मेरे खयालो कि अनंत गहराई से
निकली एक मूरत हो तुम
फिर सोचता हूँ जब तुम्हे
कोई अनदेखी हुई सी सूरत हो तुम
मैंने बहुत समझाया खुद को फिर भी
हर बार एक नई किताब हो तुम
जब भी ये सोचा कि अब कुछ जान गया हूँ तुम को
ठीक उसी पल लगता है कितनी अनजान हो तुम
हर पल हर घडी तुम को चाहा
मेरी जान हो तुम
लेकिन ये भी सच है
आज भी मेरे लिए
एक अनसुलझा हुआ सवाल हो तुम
क्यू लगता है कि कुछ मजबूर हो तुम
मेरे खयालो कि अनंत गहराई से
निकली एक मूरत हो तुम
फिर सोचता हूँ जब तुम्हे
कोई अनदेखी हुई सी सूरत हो तुम
मैंने बहुत समझाया खुद को फिर भी
हर बार एक नई किताब हो तुम
जब भी ये सोचा कि अब कुछ जान गया हूँ तुम को
ठीक उसी पल लगता है कितनी अनजान हो तुम
हर पल हर घडी तुम को चाहा
मेरी जान हो तुम
लेकिन ये भी सच है
आज भी मेरे लिए
एक अनसुलझा हुआ सवाल हो तुम
Subscribe to:
Posts (Atom)






