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Monday, March 15, 2010

प्यारी माँ


उसका एक लाल है
जल रही है ज्वर ताप से
पर लाल की दो छीक से बेहाल है
सो गई बिन तोड़े एक भी निवाला
पर सुला नहीं सकती उसको, जबतक
सान्त न हो जाये लाल की भूख ज्वाला
तब न पूछो उसकी हृदय वेदना
दूर है लाल से और सुनती है उसका रोना
खरोच भी लग जाती है अगर किसी
धारदार से उसके लाल को
है सामर्थ उस समय कि
पिघला दे वो संसार के हर औजार को
माँ के कोमल दिल का  कोई तोड़ नहीं हो सकता
उसकी ममतामई आचल कि छाव का कोई मोल नहीं हो सकता
करुणा है जिसमे ममता है जिसमे दिल में भरा है प्यार
ऐसी ही माँ है हमारी माँ के चरणों में है संसार

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